Top 10 hindi story for class 2 with moral | For Children

Top 10 hindi story for class 2 with moral:- तो कैसे हो आप सब मैन ये जो Top 10 moral stories in hindi लिखी है मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को पसंद आएगी Top 10 hindi story for class 2 with moral ये कहानी बच्चों के लिए भी है।

इस कहानी में मैन सिख भी बताई है जो आपके बच्चों के लिए जानना बहुत जरूरी है कि जिंदगी में आगे हमे कैसे बनना चाहिए और किसके राह पर चलना चाहिए Top 10 hindi story for class 2 with moral


Top 10 hindi story for class 2 with moral

Top 10 hindi story for class 2 with moral

  • नारद मुनि की ज्ञान की बाते
  • भगवान भरोसे 
  • भगवान की ज्ञान की बाते
  • चित्रकार की खामियां
  • हरिया और भोला 
  • हट्टा कट्टा आदमी भीख मांगने वाला
  • राजा का बीज 
  • पेड़ और लकड़हारा
  • मेवालाल काम में मग्न 
  • हरिया की गाय
  • सूरज का झूठ
  • मन की बात 

(1) नारद मुनि की ज्ञान की बाते | Moral story in hindi for class 2

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 एक समय की बात है नारद मुनि धरती के तरफ देख रहे थे, उन्हें एक लड़का दीखा जो बहुत बुरा था हमेसा बुरी हरकते ही करता था।

 और हमेसा भगवान को कोसता की भगवान मैं सिर्फ तुम्हार वजह से बुरा बना हूँ अगर तुमने मुझे अच्छा बनाया होता तो आज मैं इतना बुरा नही होता।

  नारद मुनि ने यह बाते सुनी और मन ही मन मुस्कुराये और बोले अरे मुर्ख बालक बागवान ने तो तुझे इंसान बनाकर ही पैदा किया था।

  लेकीन अच्छा बनना और बुरा बनना तो तेरे हाथ मे था तूने सच्चाई का रास्ता ना चुनकर बुराई का रिश्ता चुना इसलिए तू बुरा बना।

 अपनी खुद की गलती के लिए भगवान को दोष दे रहा है, यह बात आज सिद्ध होगी कि मनुष्य अपनी गलती कभी भी स्वीकार नही करता वह सारा दोष दुसरो के ऊपर ठोप देता है।

(2) भगवान भरोसे | Short Moral stories in hindi for kids 

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 एक बार की बात है हरिया अपने बैलगाड़ी पे ढेर सारा सामान लादकर एक गांव से दूसरे गांव जाता था उन समान को पहुंचाने के लिए।

 हरिया हमेसा अपने सारे काम भगवान भरोसे छोड़ देता, एक दिन हरिया अपने बैलगाड़ी पर भारी वजन लेकर जा रहा था अंधेरा हो चुका था सुनसान सड़क।

 उसी सड़क के बीचों बीच उसकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया हरिया उस पहिये को लगाने की बजाए वह भगवान से मदत की गुहार करने लगा।

 लेकीन उसे कोई भी मदत नही मिली भगवान उसे देख रहे थे लेकीन मदत नही कर रहे थे वो इसलिए अगर इस बार मदत कर दी तो यह हर बार अपनी खुद की मदत करने के बजाए भगवान के भरोसे बैठा रहेगा।

 हरिया ने बहुत मदत की गुहार की लेकीन कोई सहायता ना मिलने पर वह खुद ही लगाने का प्रयास करने लगा वह बहुत बार विफल हुआ उस पहिये को लगाने में।

 तभी उस सड़क पर एक आदमी गुजर रहा था, हरिया को मुसिब्बत में देखकर वह उसकी मदत करने चला गया और हरिया के बैलगाड़ी का पहिये लग गया।

  हरिया उस आदमी को धन्यवाद बोलने के लिए जा ही रह था लेकीन वह आदमी वहाँ से गायब हो चुका था हरिया समझ गया कि यह एक आदमी के रूप में भगवान ही थे।

Moral of this stories

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि भगवान भी उसकी मदत करते हैं जो खुद की मदत करता है, बजाय दुसरो के भरोसे बैठे रहने से।

भगवान किसी ना किसी रूप में आकर अपने भगतो हमेसा मदत करते हैं, जैसे बैलगाड़ी वाले के की।

(3) भगवान की ज्ञान की बाते | Top 10 Moral stories in hindi

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 यूगो यूगो कि बात है, एक बार बहगवां धरती के तरफ देख रहे थे उन्हें एक लड़का दिखाई दिया लड़का बहुत ही डरपोक था।

 उस लड़के को अगर कोई मार के भी चल जाता तो वह उसे कुछ नही बोलता चुप चाप सह लेता और घर पे जेक भगवान को कोसता।

 की भगवान मुझे शक्ति दो की मैं उन्हें मार संकु आप मुझे क्या आपको दया नाही आती यह देखकर की वह मुझे मरते है और मैं उन्हें कुछ नही कह पता।

 उस लड़के को देखकर भगवान कहते हैं कि मूर्ख मनुष्य यह तूने कैसे सोच लिया कि मैं तेरी मदत करूँगा क्यूँ की जुल्म करने वाले से जुल्म सहने वाला कहीं ज्यादा दोषी होता है।

 इसलिए अगर तू जुल्म सह रहा है तो इसके मतलब की तू जुल्म करने वाले से भी ज्यादा दोषी है इसलिए मैं तेरी मदत नही करूँगा।

(4) चित्रकार की खामियां | Bedtime moral stories in hindi

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 बहुत समय पहले की बात है एक चित्रकार था का चित्रकार ने एक दिन बहुत ही शानदार चित्र बनाया उस चित्रकार ने उस चित्र के अंदर बहुत सी खामियां ढूढ़नी की कोसीस की।

 लेकीन उसे कोई भी खामियां नही मिली इस चित्रकार ने सोचा कि क्यूँ ना लोगो की राय ली जाए मेरे इस चित्र के बारे में लोगो ने उस चित्रकार की चित्र की तरफ की कहा कि ऐसा चित्र हमने आज तक नही देखा।

 लेकीन चित्रकार इससे भी खुस नही हुआ चित्रकार ने अपनी चित्र को एक चौराहे पर रख दिया और एक बोर्ड पर लिख दिया कि अगर आपको इस चित्र में कोई भी गलती दिखे तो उस जगह पर गोल निसान कीजिये।

 बहुत से लोगो ने उस चित्र में खामियां निकली और उस जगह पर गोल कर दिया चित्रकार जब वापस उस चित्र को देखने आए तो उसने देखा कि उंसके चित्र पर बहुत सी गोल निसान है।

 जिसके वजह से चित्रकार उदास होगया क्यूँ की लोगो के गोल निसान के वजह से उसकी चित्र की सुंदरता खत्म होगई थी अब वह चित्र पहले जैसी नही रही।

 चित्रकार सोचने लगा की चित्र में तो कोई भींगलती नही थी चित्र तो बहुत सुंदर था फिर लोगो ने उंसके साथ ऐसा क्यूँ किया।

 चित्रकार उदास बैठा था तभी चित्रकार का एक मित्र आया चित्रकार के मित्र ने उसके उदासी का कारण पूछा चित्रकार ने अपनी उदासी का कारण बताया चित्रकार के दोस्त ने कहा।

  अब क्या कर एक अधूरा चित्र बना और वहाँ पर लिख दे कि अगर किसे भी इस आधे अधूरे चित्र को बनाते आरहा होगा तो उसे बना दे।

  जब चित्रकार शाम को वहाँ पहुंचा तो उसने देखा की चित्र के ऊपर किसने भी कुछ भी नही किया था चित्र जैसा का तैसा ही था।

 चित्रकार को समझ गया की लोगो को दूसरे की खामियां निकलने आता है लेकीन उन खामियां को सुधारना नही आता है।

(5) हरिया और भोला |Top 10 moral stories in hindi

Top 10 hindi story for class 2 with moral

  बहुत समय पहले की बात है एक गांव में हरिया नामक एक व्यक्ति रहता था उंसके पास एक छोटी सी खेत थी और एक बैल।

  हरिया बैल के साथ खेत जोतता और उनमें अपनी फसल उगता और खुस रहता मानो उसे किसी भी चीज़ की फिक्र नही उसे कुछ टेंसन नही।

  हरिया का एक दोस्त उंसके घर के बगल में ही रहता था जिसका नाम भोला था भोला के पास हरिया से बड़ा घर भी था और उंसके पास एक ट्रैक्टर भी थी।

 और हरिया से कहिं ज्यादा उसकी खेत भी थी लेकीन भोला अपनी इस काम्यबी से खुस नही था वह हमेसा टेंसन में रहता था और भोला और कामयाब होने के सपने देखता था।

 भोला ने हरिया की गरीबी देखकर उससे पूछा मित्र तुम इतने खुस कैसे रह लेते हो तुम्हारे पास तो मेरे से बहुत कम है तुम्हारे पास बड़ा घर भी नही है।

 मेरी जितनी खेती भी नही है, तुम्हारे पास कोई ट्रैक्टर भी नही है सिर्फ तुम्हारे पास एक बैल है और छोटी सी खेत और छोटा सा घर और तुम इतने गरीब फिर भी तुम इतने में खुस कैसे रह लेते हो।

 इस बात पर हरिया ने जवाब दिया मित्र मुझे जितना मिलता है मैं उतने में खुस रह लेता हुँ मैं ज्यादा की लालसा नही रखता हूँ।

  और मैं ज्यादा की लालसा रखूं भी क्यूँ इंसान की तीन जरूरत की चिझे है रोटी, जोकि मैं जो कि मैं अपने खेतों में मेहनत कर के खा लेता हूँ, कपड़ा जो कि मेरे बदन पे हमेसा रहता है और माकन जो कि छोटा ही सही पर उसमे अपना सरीर छुपाने के लिए जगह तो है।

 भोला ने कहा और ऐसो आराम की चिझे हरिया ने कहा वो तो मैं खेत मे के आनाज बेच के कर ही लेता हूं, भोला ने कहा कहाँ करते हो उतने पैसों में कँहा ऐस होता है।

 उतने पैसों में तो अपनी जरूरत की चिझे पूरी होती है, हरिया ने कहा तो बस यही तो है मेरी ऐसो आराम मेरे जरूरत की चिझे पूरी हो जाती है तो मैं उससे ज्यादा की लालसा क्यूँ करूँ।

 इंसान को जितना मिलता है उतने में ही खुस रहना चाहिए अगर इंसान उंसके उम्मीद से ज्यादा चीझ की लालसा करेगा तो कभी भी खुस नही राह पायेगा क्यूँ की उसकी लालसा कभी खत्म ही नही होगी।

 जब एक लालसा पूरी होगी तो उसे फिर से किसी दूसरे चिझ कि लालसा हो जाएगी और इस तरह उसकी लालसा बढ़ते ही जाएगी कभी खत्म नही होगी तो मुझे बतावो वह कैसे खुस रहेगा।

 इसलिए जितना मिला है उतने में ही खुस रहना सीखना चाहिए उससे ज्यादा की लालसा नही करनी चाहिए अब भोला को समझ गया था की उंसके पास इतना होने के बावजूद भी वह खुस क्यूँ नही है।

 भोला ने हरिया को धन्यवाद किया उसे इतना सीखने के लिए और कसम खाई की आज के बाद कभी भी ज्यादा की लालसा नही रखेगा जितना मिला उतने में खुस रहेगा।

(6) हट्टा कट्टा आदमी भीख मांगने वाला | hindi story for class 2 with moral

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 एक समय की बात है एक भिखारी अपनी सरीर से लाचार था वह काम नही कर सकता था, उस भिखारी के पास पैर नही था।

  इसलिए घर-घर घूमकर भीख मांगता था लोग उसकी हालत देखकर उसे भीख दे देते थे जिससे उसका गुजरा हो जाता था भिखारी का नियम था कि वह हमेसा पांच ही घर में भीख मांगता था।

 और पांचों घर मे उसे भीख मिल जाती थी जिससे उसके दिन का गुजारा हो सके, उस भिखारी के बगल में ही एक आदमी रहता था जो काम धंधा नही करता था।

  दिन भर घर पे बैठा रहता था वह भिखारी को हमेसा, देखता भीख मांगते हुए उसे लगता कि भिखारी कुछ मेहनत नही करता है।

  फिर भी उसे अच्छा खासा एक दिन में मिल जाता है, इतना कि उसका दिन का गुजारा हो जाता है वह आदमी सोचने लगा मैं भी तो बेकार ही बैठा हूं मैं भी क्यूँ ना भीख मंगू मुझे भी लोग इस भिखारी की तरह भीख दे देंगे।

  कल से मैं भी फटा कपड़ा पहनकर लोगो से भीख मांगता हूं, अगेले दिन वह आदमी उस भिखारी की तरह फटे कपड़े पहनकर लोगो के घर पे भीख मांगने चला गया।

 वह लोगो के घर भीख मांगने जाता लेकीन लोग उसे भीख नही देते और उसे अपने घर के दरवाजे से ही हकाल देते।

 लेकीन जिस घरों से वह भीख मांग के आया था उस घर पे वह भिखारी गया उसे लोगो ने भीख दिया यह दुरस्य उस आदमी ने देखा और मन ही मन सोचने लगा की लोगो ने मुझे भीख क्यूँ नही दिया इसे क्यूँ दिया।

  इस बात को जानने के लिए वह आदमी उस आदमी के घर गया जहाँ पर उसे भीख नही दिया लेकीन उस भिखारी को दे दिया उसने उस आदमी को बुलाया।

  वह आदमी घर के बाहर आया उस आदमी ने पूछा कि मैं भी तुम्हारे पास भीख मांगने आया था लेकीन तुमने मुझे भीख नही दिया लेकीन जब उस भिखारी ने तुमसे भीख मांग तो उसे क्यूँ दिया।

  आदमी ने जवाब दिया कि वह भिखारी मजबूरी में भीख मांग रहा है वह लाचार है वह चल फिर नही सकता वह मजबूर है अपनी लाचारी से इसलिए मैंने उसे भीख दिया।

  लेकीन तुम लाचार नही हो तुम चल फिर सकते हो, तुम हट्टे कट्टे भी हो तुम्हारी कोई मजबूरी नही है, तुम कहीं जाके काम भी कर सकते हो तुम अपने सौक से भीख मांग रहे हो इसलिए मैन तुम्हे भीख नही दिया।

  वह आदमी अपनी बेवकूफी के ऊपर शर्मिंदगी महसूस कर रहा था उस आदमी ने फिर कसम खाया की वह आज के बाद कभी भी किसीके आगे हाँथ नही फैलाएगा अपनी मेहनत का हमेसा खायेगा।

(7) राजा का बीज |Short moral stories in hindi for class 2

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 बहुत समय पहले की बात है एक राज्य में एक राजा रहता था वह राजा अपने बगीचे से बहुत प्यार करता था, उस राजा की उस बगीचे में जान बस्ती थी।

 राजा ने शादी नही की थी वह कुँआरा ही था, इसलिए राजा की कोई भी संतान नही थी, राजा दिन पे दिन बूढ़ा हो रहा था राजा को उसके राज्य की और उसके बगीचे की बहुत चिंता थी।

  की उसके जाने के बाद उसके राज्य की देखभाल और बगीचे की देखभाल कौन करेगा राजा सोचने लगा की वह किसे इस राज्य का वारिश घोसित करे।

  राजा के राज्य में एक से बढ़कर एक योद्धा थे लेकीन वह इस राज्य के काबिल थे की नही यह राजा को मालूम नही था, राजा ने अपने राज्य के सारे युवावों को अपने दरबार में बुलाया।

  और हर एक को एक-एक पौधों का बीज दिया और कहा की तीस दिन के अंदर जो भी अपने पौधे का सबसे ज्यादा ख्याल रखेगा और जिसका भी पौधा लंबा होगा उसे ही राजा घोसित किया जाएगा।

   राजा ने हर एक को बीज दे दिया सब बीज लेकर अपने-अपने घर चले गए 10 दिन बीत चुके थे लेकीन अभी तक किसका भी पौधा नही उग था सबका वैसे का वैसे ही था।

  कुछ लोगो ने राजा के दिए हुए बीज को बदल दिया और बाजार से नया बीज लाकर बोया ताकि उनका पौधा सबसे बड़ा हो और गिने चुने लोगो ने और कुछ दिन इंतिजार किया लेकीन उनका भी पौधा नही आया।

   बीज का बीज ही था तो उन्होंने ने भी दुशरी बीज लगा दी, लेकीन एक लड़के ने ऐसा नही किया उसने उस बीज को पौधे में बदलने के लिए हर नाकाम कोसीस की लेकीन।

  लेकीन वह अपने कोसीसी में विफल रहा उसका बीज पौधा हुआ ही नही बीज गमले के अंदर से मुह निकलता ही नही और इस तरह तीस दिन हो चुके थे।

  लेकीन उस लड़के का बीज पौधा बना ही नही राजा ने जो समय दिया था वह बीत चुका था सबने अपना अपना पौधा लेकर राजा के दरबार में जा पहुंचे।

   सबके पौधे एक से बढ़कर एक थे लेकीन उस लड़के का ही पौधा नही था उसका बीज का बीज ही था, राजा नव सबके पौधे राजा ज्यादा प्रसन्न नही हुआ।

   लेकीन राजा ने जब उस लड़के के गमले के तरफ देकह तो वह बहुत खुस हुआ और उसने उस लड़के को आगे बुलाया और पूछा की तुम्हारा बीज बड़ा क्यूँ नही हुआ।

  लड़के ने कहा महाराज मैन इस बीज को बड़ा करने के लिए हर कोसीस की लेकीन यह बीज बड़ा हुआ ही नही जैसा का तैसा ही है मुझे माफ करना मैं राजा बनने के काबिल नही हूँ।

  राजा ने कहा नही तुम्ही राजा बनने के काबिल हो ना की जिनके बीज बड़े हो चुके हैं क्यूंकि मैन बीज को जलाकर सबको दिया था ताकि बीज बड़ा ना हो सके।

  लेकीन इन सब ने राजा बनने के लालच में उस बीज को बदल दिया और दूसरा बीज लगाया लेकीन तुमने ऐसा नही किया इसलिए मेरे बाद तुम इस गद्दी के वारिश होंगे।

(8) पेड़ और लकड़हारा | Moral stories in hindi for

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 एक समय की बात है एक लकड़हारा रहता था जो पेड़ो को काटकर अपना गुजर करता था लकड़हारा हमेसा हरे भरे पेड़ो को काटता और लकड़ियों को बाजार में बेच देता।

 और उन लकड़ियों को बेचने के बाद जो पैसा आता उनसे अपने घर का गुजरा करता एक दिन लकड़हारा हमेसा की तरह पेड़ काटने जा रहा था।

 लकड़हारे ने जैसे अपने कुल्हाड़ी उठाई एक पेड़ को काटने के लिए ताभिबावज आई नही मुझे मत काटो मैन तुम्हारा क्या बिगड़ा है तुम मुझे क्यूँ नुकसान पहुँचा रहे हो।

  लकड़हारा हैरान होकर इधर-उधर देखने लगा किसकी आवाज है क्यूँ की जंगल के कोस दूर भी कोई नही दीख रहा था, लकड़हारे ने पूछा की कौन है सामने आवो पीठ पीछे क्या बोल रहे हो।

  पेड़ ने कहा इधर-उधर क्या देकह रहे हो तुम जिस पेड़ के नीचे खड़े हो मैं वही पेड़ हूँ, पेड़ ने कहा तुम हरे भरे पेड़ को क्यूँ काट रहे हो मुझे नुकसान क्यूँ पहुंचा रहे हों मैन तुम्हारा क्या बिगड़ है।

 लकड़हारे ने कहा की तुमने मेरा कुछ नही बिगड़ है यह सब मैं अपने पापी पेट के लिए कर रहा हूँ, अगर मैन ऐसा नही किया तो मैं और मेरा परिवार भूखे मार जाएंगे इसलिए मुझे तुम्हे काटना पड़ता है।

  पेड़ ने कहा तुमने कभी सोच है अगर तुम इसी तरह हरे भरे पेड़ को काटते रहे तो एक दिन इस जंगल के सारे पेड़ खत्म हो जाएंगे क्या तुम्हे मालूम है तुम हमारी वजह से ही जिंदा रहते हो।

  अगर हम नही होंगे तो तुम भी नाही होंगे लकड़हारे ने पूछा कैसे पेड़ ने जवाब दिया हम जो कार्बनडाइऑक्साइड गैस अपने अंदर लेते हैं, और अपने अंदर से ऑक्सिजिन बाहर छोड़ते हैं उंसके वजह से तुम सांस लेते हो।

  और जीवित रहते हो हम नही होंगे तो तुम सांस कैसे लोगो और जीवित कैसे रहोगे हम पेड़ हर किसी की मदत करते हैं चाहे वो बूढ़ा हो या जवान हम किसमे भी भेद भाव नही रखते।

  हम लोगो को अच्छे अच्छे फल देते है, अगर वह थक जाए तो हम उन्हें अपने छाया में बिठाते हैं और उसकी थकावट को दूर करते हैं सीतल हवा देकर।

  लकड़हारे ने कहा ठीक है लेकीन अभी मैं क्या करूँ, अगर मैन तुम्हे नही काटा तो मैं भूखे ही मर जाउँगा पेड़ ने कहा तुम पेड़ को काटो लेकीन ऐसे पेड़ को काटो जो पूरी तरह से सुख चुके हो।

  और जिनका कोई उपयोग ना हो ऐसे पेड़ को काटोगे तो पर्यावरण को भी हानि नही पहुंचेगी और तुम उन लकड़ियों को बेचकर अपना गुजर कर सकोगे।

   लकड़हारे ने पेड़ की बातों में हामी भर दी और तब से वह उन्ही पेड़ो को काटता जो पूरी तरह से सुख चुके हों जो दुबारा न उग रहे हो।

मेरे विचार:- यह कहानी मैन आपको इसलिए सुनाई क्यूंकि हमारे धरती पे से बहुत से पेड़ खत्म हो रहे हैं, अगर पेड़ नही होंगे तो हम भी नही होंगे इसलिए पेड़ो को नुकसान पहुंचाना छोड़ दे और उनकी देखभाल करे।

(9) मेवालाल काम में मग्न | Moral story in hindi for clss 2

Top 10 hindi story for class 2 with moral

  बहुत समय पहले की बात है एक गांव में सेवा राम नामक एक आदमी रहता था जिसकी बीच चौराहे पे एक किताबो की दुकान थी।

 मेवालाल को किताबे पढ़ने का बहुत शौक था वह किताबे बेचने के साथ साथ उन्हें पढ़ भी लेता था मेवालाल की किताबो की दुकान बीच चौराहे पे होने के वजह से अच्छी खासी चलती थी।

 एक दिन मेवालाल अपनी किताबो को पढ़ रहा था तभी उंसके दुकान के बाजू से एक चोर गुजरा और पुलिश उसे दूध रही थी।

 लेकीन मेवालाल ने उस चोर के तरफ ध्यान नही दिया वह तो अपना पुष्तक पढ़ने में व्यस्त था थोड़ी देर बाद पुलिश आई और मेवालाल से पूछी की तुमने किसी चोर को यहाँ से जाते हुए देखा क्या।

 मेवालाल ने कहा कि नहीं सर मैं तो आपने पुष्तक पढ़ने में मग्न था मुझे तो कुछ मालूम नही है कि पेड़ पुस्तक पढ़ने के बीच क्या क्या हुआ मुझे माफ़ कर देना।

 मेवालाल की यह बात सुनकर पुलिश वाले वहाँ से चले गए और मेवालाल वाप्स अपने पुष्तक पढ़ने में व्यस्त होगया।

Moral of this short stories

अगर आप सोच रहे हैं कि हमे इस कहानी से कुछ सिख नही मिली तो आप गलत सोच रहे हैं इस कहानी से भी हमे एक सिख मिलती है कि हम जो भी काम करे वह पूरी सिद्धात से करे।

चाहे बीच मे कोई भी क्यूँ न आये अगर मेवालाल अपनी पूरी सिद्धात से किताब को नही पड़ता तो शायद वह चोर को देख लेता और रोजाना उन आने जाने वाले गाड़ियों को भी देखता।

(10) हरिया की गाय | Top 10 moral stories in hindi 

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 कुछ ही समय की बात है एक गांव में हरिया नामक एक आदमी रहता था हरिया के पास एक छोटी सी खेती और एक बैल था खेत को जोतकर अपने हरिया अपने घर का गुजारा करता था।

 हरिया का पड़ोसी मुथुराम वो भी हरिया की तरह गरीब ही था उंसके पास हरिया इतना ही खेत था लेकीन उंसके पास बैल नही था मुथुराम हमेसा हरिया से जलता था।

  की हरिया के पास बैल है और मेरे पास बैल नही है, मुथुराम की नजर हमेसा हरिया के बैल पर रहती थी मुथुराम हरिया के बैल को गायब करने के चक्कर मे ही रहता था।

  वह हमेसा हरिया के बैल को गायब करने के लिए अलग अलग योजना बनाता और मुथुराम हर योजना में विफल हो जाता एक दिन मुथुराम को मौका मिला हरिया अपने बैल को खेत मे ही छोड़ के भाग गया।

  उसे कुछ घर पे काम याद आगया था, और मुथुराम वहाँ जा पहुंचा मुथुराम ने अगल बगल देखा उसे कोई नही दिखाई दिया उसने मौका पाते ही हरिया के बैल को वहाँ से लेकर भाग गया और बाजार में जाकर बेवह दिया।

  बैल से जो पैसे आये थे उसने उन पैसे से एक दूसरा बैल खरीद लिया और अपने घर लेकर आया जब हरिया अपने खेत मे पहुंच तो उसने देखा कि उसका बैल वहाँ से गायब है।

  अपने बैल को वह यहां से वहाँ ढूढने लगा हरिया को उसका बैल कहिं नही दिखाई दिया हरिया अपने बैल को ढूंढते ढूंढते जंगल मे जा पहुंचा और थक हार के एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

  उसने जंगल मे एक गाय देखी हरिया दौड़ के तुरंत उस गे क्व पास गया उसने चिल्ला चिल्ला के आवाज दी कि इस गाय का मालिक कौन है, यह किसकी गाय है।

  उसे कोई भी जवाब नही मिला वह इस गाय को लावारिश समझ कर अपने घर लेकर चला गया हरिया उस गाय का ढूध दुहता और घर घर जाकर बेच देता।

  हरिया ने गांव में दूध बेच बेचकर और तीन गाय खरीद ली और उन तीनों गाय कस दूध बेचकर वह अपने पड़ोसी
मुथुराम से कहीं ज्यादा अमीर होगया और मुथुराम हरिया को देखकर और जलने लगा।

 मुथुराम ने कहा कि हरिया की आज मेरी वजह से ऐसी हालत है अगर उसके पास बैल होता तो आज ऐसा नही होता वह भी मेरी तरह गरीब होता मैं तो उसका बुरा करने गया था लेकीन उंसके साथ बुरा होने के बजाय अच्छा होगया।

  यह मैन क्या किया मैं गरीब का गरीब ही राह गया और वह अमीर होगया मुथुराम अपने सर पिट के राह गया और अपनी गलती के ऊपर पछताया।

Moral Of This Short Story In Hindi

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि जो भी हमारे साथ होता है वह अच्छे के लिए ही होता शायद हमारी किस्मत में वो ना हो जैसे हम सोच रहे हों कहीं उससे ज्यादा हो।

इसलिये हमे कभी भी किसी चिझे के जाने का पछतावा नही करना चाहिए क्या पता उस चिझे से कहीं ज्यादा हमारी किस्मत में लिखा हो।

(11) सूरज का झूठ |moral stories in hindi for kids 

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 एक समय की बात गई सूरज नामक एक चंचल लड़का रहता था जो कि बहुत ही सरारती था वह हमेसा सरारत करता था और लोगो से झूठ बोलता था।

 सूरज हर एक बात पे सभी से अपने घर मे झूठ बोलता था एक दिन सूरज ने घर में एक कांच की गिलास तोड़ दी और जब उससे पूछा गया कि इस कांच की गिलास को किसने तोड़ा तो।

 सूरज ने सच बोलने के बजाय झूठ बोल दिया की मैन नही तोड़ा है किसी और ने तोड़ा और घर मे सूरज की माँ और उसके छोटे भाई के सिवाय कोई नही था।

  सूरज की माँ को लग गया था कि सूरज ने ही तोड़ा है और वह झूठ बोल रहा है सूरज की माँ देखना चाहती थी कि सूरज एक झूठ छुपाने के लिए कितना झूठ बोलता है।

 उसकी माँ उससे सवाल करती गई और सूरज एक झूठ को छुपाने के लिए झूठ पे झूठ बोलता गया और आखिर में उसने सच बोल ही दिया क्यूँ की उसकी माँ ने उससे सवाल ही ऐसे किये थे।

 की उसे आखिर में सच बोलना ही था और उसे सिख भी मिल गई कि झूठ बोलना अच्छी बात नही है एक झूठ को छुपाने के लिए हमे कई झूठ बोलने पड़ते हैं।

(12) मन की बात | Top 10 moral stories in hindi for children 

Top 10 hindi story for class 2 with moral

 किसी समय की बात है मुन्ना नामका एक लड़का रहता था जो हमेसा मुसीबतों का सामना करने डरता था वह हमेसा मुसीबत से दूर भागता था।

 मुन्ना को मुसीबतों का सामना करने नही आता था इसलिए वह अपनी हर एक मुसबतो से डरता रहता था अब मुसीबत किसी भी प्रकार की हो सकती है उसे बयान नही किया जा सकता।

 जैसे कि पैसों की प्रॉब्लम, गरीबी, झगड़ा, फेल होने का डर, लोग क्या कहेंगे यह सोचना, और इत्यादि प्रकार की मुसीबतो से डरना।

  एक दिन मुन्ना अपनी सारी मुसीबतों से तंग आकर उसने खुद खुसी कर ली।

Moral of this short story

मैं आपसे पूछता हूँ यह कंहा की हँसियारी है कि अपनी मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए हम खुद खुसी कर ली मेरी नजर में यह इंसान की सबसे बड़ी घटिया सोच है।

मुसीबत हर किसी को रहती है दुनिया मे ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है जिसे कोई भी मुसीबत ना हो चाहे वो आप हो या मैं लेकीन हमे उन मुसीबतों का डट के समान करना  चाहिए ना कि खुद खुसी।

अगर हम पढ़ाई में फेल हो जाए और यह सोचने लगे कि लोग क्या कहेंगे तो मेरे भाई लोग का काम है, कहना, लोग सिर्फ बुराइया देखते हैं अपनी अच्छाइया नही लोग दो दिन उस बात के ऊपर सोचेंगे बाद में वो भी भूल जाएंगे लेकीन उंसके लिए हम अपनी जान तो नही ले सकते ना।

और आखिर में मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि मुसीबत सबके पास होती है किसी के पास बड़ी तो किसी के पास छोटी और ये मुसीबते ही जिंदगी जीने का मजा देती है।

और अगर मुसीबत नही तो जिंदगी नही इसलिए मुसीबत का सामना करना सीखिए ना कि उससे डर के भागना।

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