15+ Best Moral stories in hindi for class 7 | Hindi kahaniya

Moral stories in hindi for class 7:- मैंने आपके लिए 11 best Moral stories in hindi for class 7 लिखा है जो कि मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आये मेरी लिखी इस सारी कहानी से आपको कोई ना कोई शिक्षा जरूर मिलेगी जो कि मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको आगे चलकर काम आएगी Moral stories in hindi for class 7 


Moral stories in hindi for class 7

Moral stories in hindi for class 7
  • जम्बो
  • तीन मछलियां 
  • पेड़ की गवाही
  • राम श्याम और चेतन 
  • लेखक और चापलूस चोर
  • काली जबान
  • शेर और भालू 
  • ब्रिजु और भगवान
  • सोनू और मोनू
  • साहूकार और किसान 
  • देवी और किसान 

 (1) जम्बो #1 Moral hindi stories for class 7

Moral stories in hindi for class 7

  एक जंगल में दो हांथी रहते थे एक हांथी और एक हथनी वह दोनों बहुत ही खुशहाल से अपना जीवन व्यतीत करते थे उनको दोनों को एक बच्चा हुआ उन्होंने उस बच्चे का नाम जंबो रखा ।

 जम्बो बहुत ही सरारती बच्चा था वह अपने माता और पिता की बात नही सुनता था, उनकी बात को हमेसा अनसुना कर देता और, वह अपने मगन में रहता था ।

   उस जंगल में एक घाटी थी और उस घाटी में लकड़बघो का झुंड रहता था, जम्बो के माता पिता हमेसा बोलते की उस घाटी में नही जान उस घाटी में लकड़बघो रहते हैं जो तुम्हे खा जाएंगे ।

  लेकीन जम्बो उनको बोलता की मुझे कोई नही खा सकता मैं बहुत ताकतवर हूँ, मैं लकड़बघो से नही डरता जम्बो जब भी उस घाटी के पास जाने की कोसीस करता तो उसके माता पिता हमेसा रोक लेते।

  एक दिन जम्बो अपने माता पिता से नजरे चुराते चुराते उस घाटी में चला गया उन लकड़बघो से लड़ाई करने के लिए लकड़बघो ने जम्बो को अकेले देख उसके ऊपर हमला करने के लिए आगे बढ़े ।

   जम्बो उनके झुंड को देखकर डर गया उनसे भागने की कोसीस की, लेकीन उन्से भाग नही पाया अब जम्बो काफी डर गया था उसे लगा की अब लकड़बघो मुझे मार डालेंगे लेकीन तभी उसके माता पिता हांथीयो का झुंड लेके आगये ।

   और लकड़बघो उन हांथीयो के झुंड से डर के भाग गए और इस तरह उसके माता पिता ने जम्बो की जान बचा ली, और जम्बो को अपने गलती से सिख भी मिल गया ।

सिख:- हमे हमेसा अपने से बडे व्यक्तियों के बातों का पालन करना चाहिए क्यूंकि वह हमेसा हमारे भले के लिए बोलते हैं ना की हमारे नुक्सान के लिए ।

(2) तीन मछलियां #2 hindi stories for class 7

Moral stories in hindi for class 7

  एक तलाब में तीन मछलियां रहती थी, पिंकी, चिंकी, और मिन्की, तीनो की बहुत गहरी दोस्ती थी तीनो हमेसा साथ साथ रहते तीनो कभी भी एक दूसरे के बिना कहीं नही जाते ।

  एक दिन तलाब में एक मछुआरा आया मछलियों को पकड़ने के लिए उस मछुआरे ने पानी के अंदर एक जाल फेक उस जाल में एक भी मछली नही फसी फिर उस मछुआरे ने दूसरा जाल फेका एक इस बार फिर कोइ भी मछली जाल में ना फँसी ।

   मछुआरे ने जैसे ही तीसरा जाल फेंका तभी उस वक्त वह तीनो मछलियां वहां से गुजर रही थी और वह तीनो इस जाल में फंस गई ।

   वह तीनो चिल्लाने लगी बचवो बचवो लेकीन उनकी मदत के लिए कोई भी नहीं आया फिर पिंकी ने चिंकी और मिन्की से कहा की हम उस मछुआरे के सामने मारने का ड्रामा करेंगे ।

   जिससे मछुआरा हमे मार हुआ समझ कर वापस पानी में फेक देगा, चिंकी और मिन्की ने उनकी बातों मो हामी भरा, मछुआरे ने जैसे ही जाल को उनपर लिया उसने देखा की तीन मछलियों जाल के अंदर फांसी है लेकीन वह भी मेरी हुई है ।

  उस मछुआरे ने उन तीनो मछलियों को वापस उस पानी के अंदर फेक दिया पानी के अंदर जाते ही उन मछलियों ने अपना ड्रामा खत्म किया और उस मछुआरे से बचने के खुसी में नाचने गाने लगी, और वहाँ से चली गई ।

सिख:- मुसीबत के वक्त घबराने के बजाए हमे अपने सूझ बुझ से काम लेना चाहिए, फिर मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी क्यूँ न हो वह आसानी से टल जाएगी ।

(3) पेड़ की गवाही #3 moral stories in hindi for students class 7

moral stories in hindi for students class 7

 एक गांव में दो मित्र रहते थे चंगु और मंगू दोनों में गहरी मित्रता थी, एक दिन चंगु और मंगू किसी काम के वजह से दूसरे गांव में गए हुए थे, चंगु और मंगू का काम पूरा होने के बाद वह अपने गांव लौट रहे थे ।

 तभी उनको राश्ते में एक सोने से भरा हुआ थैला मिला, दोनों ने आपस में आधा आधा बाटने का निश्चय किया उनको लेटते वक्त रात बहुत होगई थी इसलिए उन्होंने एक पेड़ के नीचे विश्राम करने का सोचा ।

 और दोनों ने निश्चय किया की सुबह होते ही हम सोने का आपस में बटवारा कर लेंगे, चंगु अपने पास ही सोना लेकर सो गया, मंगू के मन के अंदर लालच आगई और उसने वह सारा सोना चंगु के हांथो से छीनकर उस पेड़ के एक छेद में रखकर सो गाय ।

 और यह निश्चय किया की बाद में इस सोने को यहां से लेके अपने घर चल जाऊंगा इससे चंगु को मेरे ऊपर सक भी नही होगा की सारा सोना मेरे पास है, जैसे ही सुबह हुई चंगु सबसे पहले जागा और उसने देखा की सोना उसके पास नही है ।

  चंगु आज बाजू देखने लगा चंगु को सोना कहीं नही मिला फिर चंगु ने मंगू को जगाया मंगू जागा और चंगु से पूछा की क्या हुआ तुमने मुझे इतना जल्दी क्यूँ जगाया, फिर चंगु ने उसे बताया की सोने की थैली मिल नही रही है मैन सभी जगह खोज लिया ।

  मंगू नाटक करने लगा उसने कहा की क्या सोना नही मिल रहा तुम्ही तो सोने को लेकर सोये हुए थे फिर सोना कहाँ चला गया, मंगू ने चंगु से कहा की कंही ऐसा तो नही की सोना तुमने कंही छुपा दिया है, और उसे खोजने का नाटक कर रहे हो ।

   चंगु ने कहा की नही ऐसा नही है मैन नही चुराया है, चंगु ने कहा की ऐसा भी हो सकता है की सोने को तुमने कंही छुपाया हो और तुम उसे ढूढने का नाटक कर रहे हो मंगू ने कहा की नही मैन भी नही चुराया है, दोनों की आपस में इसी बात पे लड़ाई हो गई ।

   चंगु कहता मंगू ने चुराया है और मंगू कहता की चंगु ने चुराया है, चंगु ने कहा की ठीक है हम राजा के पास जाते हैं राजा ही फैसला करेंगे की चोर कौन है मंगू ने कह की ठीक है, मुझे मंजूर है दोनों राजा के महल में गए और राजा को सारी बात बताई ।

   राजा ने बहुत सोच विचार के बाद उनसे पूछा की तुम दोनों के आल्वा वहाँ पर और कौन था चंगु ने कहा की कोई नही सराकर हम बस एक पेड़ के नीचे ही सोये हुए थे, राजा ने कहा की ठीक है कल सुबह हम पेड़ से ही पूछेंगे की चोरी कौन है, अभी तुम दोनों अपने अपने घर जावो ।

   मंगू घबरा गया और सोचने लगा की, अगर पेड़ ने गवाही दे दी तो मैं तो फस जाऊंगा, मंगू ने एक योजना बनाई उसने अपने एक दूसरे मित्र को सारी बात बताई और कहा की अगर मैं इस गुनाह से बच गया तो वह का सोने में से हम दोनों आधा आधा बाट लेंगे लेकीन उसके लिए तुम्हे मेरा एक काम करना होगा ।

   मंगू के मित्र ने पूछा क्या मंगू ने कहा की तुम उस पेड़ के ऊपर चढ़कर उस पेड़ के घनी पत्तियों में छुप जाना और राजा जब पूछेगा की चोर कौन है तो तुम चंगु का नाम ले लेना मंगू के मित्र ने कहा ठीक है, और वह उसी वक्त उस पेड़ के पास चला गया मांग के बताये मुताबिक।

   अगेले दिन राजा और राजा के सिपाही सहित चंगु और मंगू उस पेड़ के पास गए राजा ने उस पेड़ से पूछा की हे पेड़ मुझे बताने  की कृपा करे की इन दोनों में से सोने की चोरी किसने की है पेड़ बोला की चोर चंगु है, चंगु ने सारा सोना चुराया है ।

   राजा उसी वक्त समझ गया की चोर मंगू है राजा ने अपने सिपाहियों को आदेश दिया की मंगू को काराग्रह में डाला जाए लेकीन उससे पहले मंगू से पूछा गया की उसने सोने को कहाँ छिपाया है, मंगू ने राजा को सोने का पत्ता बात दिया मंगू को चोरी और अपने मित्र को धोखा देने के जुर्म में उसे 5 वर्ष की सजा सुनाई गई ।

   और मंगू के मित्र को अपने चोर मित्र का साथ देने के लिए सिर्फ 1 माह काराग्रह में रहने की सजा सुनाई गई, और राजा ने सारा सोना चंगु को दे दिया

सिख:- सच चाहे जितना भी छुपा लो वह किसी ना किसी तरह बाहर आही जाता है

(4) राम श्याम और चेतन #4 stories in hindi with moral for class 7 

Moral stories in hindi for class 7

   बहुत समय पहले की बात है एक गांव में चेतन नामक एक आदमी रहता था उसे दूसरे लोगों को उल्लू बनाने में बड़ा मजा आता कई सारे लोगो उसके बातों में आकर उल्लू भी बन जाते ।

   चेतन दुसरो के बीच में आग लगने का भी काम करता था जिससे उनके बीच अनबन हो जाती, उसी गांव में दो मित्र रहते थे श्याम और राम दोनी में गहरी मित्रता थी, एक दिन चेतन शयम के पास गया और बोला की तुम्हारे घर में आग लगी है जल्दी जावो पानी लेकर और उस आग को बुझावो ।

   बेचारा श्याम उस चेतन के बातों में आगया वह आसपास के कुव्ह लोगो को अपने साथ लेकर अपने घर की आग भुझाने के लिए पानी लेकर गया जब वह अपने घर गया तो देखा की उसके घर पे आग ही नही लगी है।

   तभी चेतन वहाँ पर आकर हंसने लगा और कहा की उल्लू बनाया बड़ा मजा आया सारे गांव वाले श्याम के ऊपर हंसने लगे श्याम को वहाँ पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा श्याम अपने मित्र राम के पास गया और श्याम ने राम को सारी बात बताई की उसके साथ चेतन ने क्या किया ।

   राम ने श्याम को आस्वासन दिया की तुम फिक्र मत करो तुम्हारे इस अपमान का बदला मैं उस चेतन से जरूर लूंगा फिर राम ने एक योजना बनाई और वह योजना उसने श्याम को बताई दोनों चेतन के पास गए, उस दिन चेतन का जन्मदिन था ।

   और चेतन को कहा की आरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो तुम्हारे जन्मदिन के अवसर पर गांव वालेने मिलाकर तुम्हारे लिए जस्न की तैयारी की है, गांव के बीच वाले चौराहे पर और तुम्हें कब से खोज रहे हैं तुम जावो उधर जल्दी से ।

   यह सुनते है चेतन वहाँ से खुसी के मारे गांव के चौराहे पर जा पहुंचा लेकीन वहाँ जाने के बाद उसे उस चौराहे पर कोई जस्न नही दीख रहा था तभी राम और श्याम दोनों आये और उसके उपर हंसने लगे और दोनों साथ में बोले उल्लू बनाया बड़ा मजा आया, यह कहकर और जोर जोर से हंसने लगे ।

   आस पास के लोगो ने उनके हंसने का कारण पूछा तो राम और श्याम ने गांव वालो को सारी घटना बताई गांव वाले भी उसके ऊपर हंसने लगे की दुसरो को उल्लू बनने वाला आज खुद उल्लू बन गया बड़ा मजा आया इसके साथ ऐसा ही होना था ।

   चेतन वहाँ पर हंसी का पात्र बनकर राह गया और वहाँ से बिना कुछ बोले अपने घर चला गया, लेकीन चेतन ने अपने मन में ठान लिया था की अपने इस अपमान का बदल वह दोनों से जरूर लेंगे चेतन ने सोच लिया था की दोनों की दोत्ती को तोड़ देगा दोनों को आपस में दुश्मन बना देगा ।

   इस बदले की भावना से उसने राम के घर को अपने साथियो के साथ मिलकर आग लगा दी और पूरे गांव में हल्ला मचा दिया की राम के घर को आग श्याम ने लगाई है, राम भी चेतन और गांव वाले के बातों में आगया और राम भी मान बैठा की उसके घर को आग श्याम ने ही लगाई है ।

    राम ग़ुस्से से आग बाबुल होगया वह श्याम को मारने के लिए उसके घर गया और उसे मारने लगा श्याम को समझ में नही आरहा था की राम ऐसा क्यूँ कर रहा है, राम को गांव वालो ने शयम को मारने से रोका श्याम उससे पूछने लगा की क्या हुआ मित्र तुम मुझे इस तरह क्यूँ मार रहे हो मेरा क्या कसूर है ।

   राम ने कहा की भोला मत बन मेरे घर को आग लगाके कहता है की मैन क्या किया, आज के बाद तेरी और मेरी दोत्ती खत्म तू मेरा दुश्मन है मित्र नही, श्याम कहने लगा की नही मित्र तुम्हे कुछ गलत फैमि हुई है मैन ऐसा नही किया है मेरा विस्वास करो, राम शयम की एक सुनने के लिए तैयार नहीं था, राम वहाँ से चला गया ।

  श्याम सोचने लगा की, राम के साथ ऐसा किसने किया है, और क्यूँ किया है और इन सब के बीच मेरा नाम क्यूँ आया श्याम इन सब सवालों के जवाब ढूढ़ने लगा कुछ दिन बाद श्याम गांव के एक घर से गुजर रहा था तभी उसने सुना की ।

  बेचार श्याम ने राम के घर को आग भी नही लगाई वह आग हमने और चेतन ने मिलकर लगाई है फिर भी इन सब के बीच नाम उसका आया दोनों की मित्रता टूट गई इतनी बाते सुनकर वह सारी बाते समझ गया और फौरन राम के पास गया ।

   राम शयम को देखते ही उसके उपर हावी होगया और उसे मारने लगा श्याम ने कहा की दो मिनट बस मेरी बात सुन ले फिर बाद में तू मुझे जितना चाहे उतना मार ले राम मान गया और बोला ठीक है बोल जो बोलना है ।

  श्याम ने राम को सारी बात बताई राम ने कहा की तू अपने बचावे के लिए झूठ बोल रहा है तेरे पास क्या सबूत है शयम ने कहा की चल मेरे साथ श्याम राम को उस घर के पास लेके गया और श्याम उन लोगो को डरा धमकाकर उनसे सच्चाई उगलवाने लगा उन लोगो ने डर के मारे सारा सच्च राम को बत दिया ।

  राम को अपनी गलती के ऊपर पछतावा हुआ और उसने गांव वालो को सारी सच्चाई बताई और गांव वाले राम और श्याम के साथ चेतन को मारने के लिए उसके घर पहुंच गए उसे मार पीटकर पुलिश के हवाले कर दिया ।

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Moral stories in hindi for class 3

सिख:- हमे कभी भी किसी के कही सुनी बात के ऊपर भरोसा नही करना चाहिए जब तक हम उस बात की अच्छे से जांच पड़ताल ना कर ले तब तक हमे किसी भी इंसान की बात के ऊपर भरोसा नाही करना चाहिए ।

(5) लेखक और चापलूस चोर #5 stories in hindi with moral for class 7

Moral stories in hindi for class 7

  बहुत समय पहले की बात है, एक लेखक हुआ करते थे, जिनका नाम प्रेम प्रकाश वर्मा था, प्रेम प्रकाश वर्मा ने बहुत सारी से पुस्तके लिखी थी जैसे की जीवन का मेल, बिना पानी के जीवन, बिना मनुष्य की धरती, और इत्यादि प्रकार की पुस्तके उन्होंने लिखी थी ।

  उनकी पुस्तको को लोगो से बहुत प्यार मिला, लोग इनकी पुस्तके पढ़ना बहुत पसंद करते थे, लेखक प्रेम प्रकाश वर्मा अकेले ही रहते थे, उनकी अभी तक सादी नही हुई थी और उनके रिस्तेदार भी कोई नही थे ।

   लेखक प्रेम प्रकाश वर्मा की लिखी हुई पुस्तके अच्छे दामो में बिक जाती थी लोग प्रेम प्रकाश वर्मा की लिखी हुई पुस्तके को बड़े चाव से पढ़ते थे, लेखक को अपनी प्रसंसा बहुत पसंद आती थी अगर कोई राह चलते व्यक्ति उनकी पुस्तको की थोड़ी से भी तारीफ कर देता तो लेखक फुले नही समाते थे ।

   लेखक ने लेखक जितना प्रसिद्ध होते गए उतना ही धनवान होते गए, एक दिन लेखक कुछ काम से दूसरे शहर चले गए शहर का काम खत्म होते ही वह ट्रैन से अपने घर लौट रहे थे ।

  तभी लेखक को का ट्रेन में एक आदमी मिला जो लेखक का बहुत बड़ा प्रसंसक था, लेखक को उसने देखते ही कहा की मुझे अपनी आंखों के ऊपर भरोसा नही होता की आप मेरे साथ बैठे हुए है ।

  मैन आपकी अभी तक की सारी पुस्तके पढ़ी है, मुझे आपकी लिखी हुई सारी पुस्तके बेहत पसंद है, वह आदमी लेखक को उसकी लिखी हुई पुस्तके गिनवाने लगा की मैन आपकी यह पुस्तक पढ़ी है मैन आपकी वह पुस्तक पढ़ी है।

   लेखक बहुत ही ज्यादा प्रसन्न हुआ, वह मन ही मन बहुत ज्यादा खुस हो रहा था की मैं कितना भग्यशाली हूँ की मुझे इतने चाहने वाले प्रसंसक मील हैं, मेरी इतनी तारीफ करते हैं वह आदमी पूरे ट्रेन में बस उस लेखक की तारीफ करते रहा ।

   आस पास के लोग उस लेखक को देखकर सोचने लगे की यह आदमी कौन है, और यह दूसरा आदमी उसकी इतनी तारीफ क्यूँ कर रहा है, फिर बाद में आस पास के लोगो को मालूम पड़ा की यह एक लेखक है ।

  वह लेखक उस आदमी से उसका परिचय पूछने लगा उस आदमी ने अपना सारा परिचय लेखक को बताया और कहा की मैं काम की तलाश में शहर जा रहा हूँ, लेखक ने कहा की मैं भी उसी शहर में रहता हूँ ।

  लेखक ने पूछा की आप शहर में कहाँ रहते है फिर उस आदमी ने बोला की मैं शहर में किसी को भी नही जनता हूँ, और मेरे रहने की भी शहर में अभी तक व्यवस्ता नही है, मैं शहर में जाकर आज के दिन कहीं राह लूंगा ।

   अगले सुबह मैं अपने रहने की व्यवस्ता करूँगा और काम की तलाश करूँगा, उस आदमी ने लेखक की इतनी तारीफ कर दी थी की लेखक उससे बहुत प्रभावित होगया था लेखक ने कहा उस आदमी से कहा की जब तक आपके रहने की व्यवस्ता नही होता तब तक आप मेरे साथ रहिये ।

   उस आदमी ने लेखक का आभार प्रकट करते हुए कहा की आपके जैसा दयालु लेखक मैन आने जीवन में आज तक नही देखा, लेखक उस आदमी को अपने घर लेकर गया लेखक और वह आदमी खाना खाने बैठ गए दोनों ने आपस में ढेर सारे गप्पे लड़ाई और फिर सोने चले गए ।

   लेखक के सोते ही वह आदमी उठा दर्शल वह आदमी एक चोर था उसने अभि तक जितनी भी लेखक की प्रसंसा की वह सब झूठ था वह आदमी कोई लेखक का प्रसंसक नही था वह आदमी लेखक के घर में चोरी करने के लिए अभी तक नाटक कर रहा था ।
 
  लेखक के घर में जितना भी कीमती समान था उस आदमी ने वह सारा कीमती समान चुरा लिया और उसकी तिजोरी में जितने भी पैसे थे उन सब पैसों को भी चुरा लिया और वह आदमी वहाँ से फरहार होगया ।

   अगले दिन जब लेखक सो के उठा तो उसने अपने घर और अपने तिजोरी को देखा तो लेखक अपना सर पकड़ के रोने लगा और उस लेखक को सब कुछ समझ में आगया ।

सिख:- हमे कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के ऊपर भरोसा नही करना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के चापलूसी बातों में नही आनी चाहिए पता नही कौन व्यक्ति कैसा हो ।

जब तक हमे उस व्यक्ति के ऊपर पूर्ण तरीके से विस्वास ना हो और उस व्यक्ति के बारे में हमे जब तक कुछ मालूम ना हो तब तक भरोसा नही करना चाहिए ।

(6) काली जबान #6 in hindi stories with moral for class 7

Moral stories in hindi for class 7

  एक जंगल में मुनिया नाम की एक बकरी हुआ करती थी उस बकरी की काली जबान थी वह बकरी जो भी बोलती उसका उल्टा होता अगर वह बकरी किसीकी भलाई के बारे में सोचती तो उस आदमी के साथ बुरा हो जाता ।

  बकरी के इस काली जबान के वजह से बकरी से कोई बाते भी नही करता था, बकरी का उस जंगल में कोई भी मित्र नही था बकरी हमेसा अकेले ही रहती थी, बकरी अगर किसी जानवर से बाते भी करने जाती तो वह जानवर वहाँ से भाग जाता ।

 ताकि बकरी उसके बारे में कुछ अच्छा ना सोचने लगे, एक बार जंगल में सुख पड़ गया था जंगल में जितने भी नदी, तालाब, झरने, थे वह सारे सुख रहे थे और जंगल के पेड़ भी बिना पानी के सुख रहे थे ।

  जानवर जमीन की खुदाई करने लगे ताकि जमीन में से पानी निकल सके लेकीन जानवरो की यह भी तरकीब विफल रही जमीन के अंदर का भी पानी सुख गया था ।

  जानवर बिना पानी के जंगल को धीरे-धीरे छोड़ने लगे थे वह दूसरे जंगल जा रहे थे पानी के तलाश में लेकीन दूसरे जंगल जाने पर भी जानवरो को पानी नसीब नही हुआ आस पास के जितने भी जंगल थे वह सारे जंगल में अकाल पड़ा था, सारे जंगल का पानी सुख गया था ।

  सभी जानवरो ने जंगल में एक सभा बुलाई उस सभा में सभी जानवर उपलब्ध थे सभी जानवर इस अकाल से कैसे छुटकारा पाया जाए इसके ऊपर विचार विमर्श कर रहे थे लेकीन उन जानवरो को कोई भी राश्ता नही सूझ रहा था ।

  उस सभा में बैठा एक खरगोश बोला की इस अकाल से छुटकारा पाने के बस एक ही रास्ता है की हम मुनिया बकरी से सहायता ले सभी जानवर बोले के वह छोटी से जान क्या कर पाएगी ।

  खरगोश बोला की आप सभी को अच्छे से पता है की मुनिया की काली जबान है वह जो भी बोलती है उसका उल्टा होता है, जानवरो ने कहा की हाँ यह तो सही है, तो इसमें वह हमारी सहायता कैसे करेगी ।

   खरगोश बोला की अगर हम मुनिया उल्टा बोलेगी तो सीधा होगा हम मुनिया को कहेंगे की तुम इस जंगल के बारे में कहो की इस जंगल में कभी बरसात ना हो और जंगल के सारे पेड़ हमेसा के लिए सूखे रहे ।

   अगर मुनिया ऐसा बोलती है तो इसका उल्टा होगा जंगल में बारिश होगी और सभी नदी, तालाब, झरने पहले के जैसे होजाएंगे और हमारे पेड़ भी हरे भरे हो जाएंगे जानवरो ने खरगोश की इस योजना की तारीफ की ।

  और कहा की लेकीन उस बकरी के पास इस योजना को लेकर कौन जाएगा और अगर वह बकरी इस योजना से नही मानी तो, क्यूँ की हमने उस बकरी के साथ हमेसा दुर्व्यवहार किया है ।

  सभी जानवर बोले की हम सब बकरी के पास जायँगे और अपनी इस गलती के लिए माफी मांगेंगे, सारे जानवर बकरी के पास गए और उसे अपनी योजना बताई और बकरी से अपनी अभी तक की सारी गलतियों के लिए माफी मांगी ।

 बकरी दिल के अच्छी थी, इसलिए उसने उनकी गलतियों को माफ कर दिया और उनकीं इस योजना के लिए मान भी गई खरगोश ने जैसा बकरी को बोलने के लिए कहा ( इस जंगल में कभी बरसात ना हो और जंगल के सारे पेड़ हमेसा के लिए सूखे रहे ) बकरी ने वैसा ही बोला ।

  अगले दिन जंगल में बारिश हुई सारे जानवर बहुत ही खुस हुए और जंगल पहले जैसा हार भरा होगया और सारे नदी, तालाब, और झरनो में फिर से पानी आगया, बकरी का सारे जनवरो ने आभार प्रकट किया ।

(7) शेर और भालू #7 Moral story in hindi for class 7

Moral story in hindi for class 7

   बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में शेर और भालू हुआ करते थे, शेर और भालू की आपस में कभी भी नही पटती थी दोनों आपस में हमेसा लड़ते रहते थे वैसे तो शेर जंगल का राजा था, शेर दूसरे खूंखार जनवरो को अपने जंगल में आने से रोकता था ।

  लेकीन शेर किसी खूंखार सीकरी से कम नही था, वह अपने जंगल में रहने वाले जनवरो का ही शिकार करता था, शेर का सबसे बड़ा जानी दुश्मन भालू था शेर ने उस भालू को मारने की बहुत कोसीस की लेकीन वह विफल रहा ।

  शेर जब भी भालू के ऊपर हमला करता तो भालू उस शेर के हमले से अपनी चतुराई लगाके कैसे ना कैसे बच जाता और शेर को हमेसा अपनी मुह के बल खानी पड़ती भालू उस शेर के डर से अपनी जगह बदलते रहता ।

  लेकीन शेर उसके जगह का पत्ता लगाके उससे बच जाता भालू बहुत ही शांत किस्म का इंसान था उस भालू को अहिंसा पसंद नही थी लेकीन उस शेर के वजह से भालू को भी अहिंसा करनी पड़ती थी ।

  एक बार शेर शेर भालू के पीछे पड़ा उसे मारने के लिए भालू उससे भाग रहा था, लेकीन भालू और शेर भागते भागते एक खाई के पास चले गए शेर भालू से कहने लगा की अब कहाँ भाग के जावेगे भालू महराज आगे रास्ता ही नही है ।

 अगर तुम खाई में कूदते हो तो भी मरोगे और अगर मैं तुम्हारे ऊपर हमला करता हूँ तो भी तुम मरोगे, भालू उस शेर से अपनी जान की भीख मांगने लगा भालू ने कहा की महराज मुझे छोड़ दो मेरी जान मत लो ।

 लेकीन शेर भालू को एक सुनने के राजी नही था, वह भालू के पास धीरे धीरे बढ़ रहा था उसे मारने के लिए और भालू धीरे धीरे खाई के तरफ बढ़ रहा था उससे बकहने के लिए ।

  भालू खाई के किनारे आके रुक गया और शेर ने बोला और जा पीछे देखता हूँ कब तक तू बचता है, बहुत भगाया है तूने मुझे आज तू नही बचेगा आज तू मेरा जरूर भोजन बनेगा जैसे ही शेर ने भालू को मारने के लिए भालू के ऊपर छलांग लगाई ।

 शेर खाई के अंदर गिर गया और एक पत्थर को पकड़कर खाई के अंदर लटक गया शेर अपनी जान की भीख मांगने लगा उसने भालू से कहा की मुझे बचा लो आज के बाद मैं तुम्हे कभी नही खउँगा ।

  दया कार के मुझे गिरने से बचा लो मैं मरना नही चाहता, भालू को शेर की इस हालत पे दया आगई वह जल्दी से जंगल में गया और बरगद के पेड़ की लटकी हुई डाली को तोड़ के लेके आया ।

  और भालू ने उस डाली को शेर तरफ फेक दिया और कहा इसे पकड़ लो मैं तुम्हे ऊपर खींच लूंगा शेर ने उस डाली को पकड़ लिया और ऊपर आगया और उसने भालू का आभार प्रकट किया ।

   और कहा की अगर तुम चाहते तो मुझे वहीं पे छोड़ कर तुम भाग सकते थे लेकीन तुमने ऐसा नही किया तुमने उस वक्त मेरी जान बचाई यह जिंदगी तुम्हारे नाम होगई दोस्त यह कहकर शेर ने भालू को गले लगा लिया ।

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Moral stories in hindi for class 3

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती हैं कि हमे जरूरी नही है की जैसा उस व्यक्ति ने हमारे साथ किया है हम भी उसके साथ वैसा ही करे फिर उस व्यक्ति में और हमारे में क्या फर्क राह जाएगा ।

अगर भालू भी शेर के साथ शेर के जैसा व्यवहार करता तो उस शेर में और उस भालू में क्या फर्क होता इसलिए उस भालू इस शेर की जान बचाई और शेर को भी अपनी किये पर शर्मिंदगी महसूस हुई इसलिए शेर ने भालू से माफी मंगा ।

(8) ब्रिजु और भगवान #8 Moral stories in hindi for class 7 

 Moral stories in hindi for class 7

   एक गांव में ब्रिजु नामक एक आदमी रहता था, ब्रिजु बहुत ही गरीब आदमी था ब्रिजु के घर में उसकी बीवी और उसका एक लड़का रहता था, ब्रिजु के घर में हाँथ से चलाने वाली एक चक्की थी उस चक्की से वह दूसरे लोगो का आनाज पिस्ता था ।
 
  जैसे गेहूं, चना, मक्का, चावल, और इत्यादि प्रकार की आनाज पिस्ता था इससे ब्रिजु को पैसा मिलता था जिससे ब्रिजु का घर चलता था, ब्रिजु के बगल में ही ब्रिजु का भाई रहता था जिसकी एक किराने की दुकान थी ।

  ब्रिजु का भाई ब्रिजु से बहुत नफरत करता था अगर ब्रिजु अपने भाई से पैसा मांगने चल जाता तो उसका भाई उसे बेइज्जत करके वहाँ से भाग देता ब्रिजु का भाई ब्रिजु के ऊपर थोड़ी सी भी दया नही दीखता ।

  इसलिए ब्रिजु अपने भाई के पास मदत मांगने नही जाता था, वह आनाज पीस कर ही अपने घर का गुजर करता ब्रिजु अपने चक्की से काफी पैसा काम लेता यह देख ब्रिजु के भाई को जलन होती ।

  उसे लगता की अगर ब्रिजु ऐसा ही काम करते रहा तो वह एक दें मुझसे भी ज्यादा पैसे वाला हो जायेगा इसलिए ब्रिजु के भाई ने ब्रिजु के चक्की चुराने का फैसला किया और एक रात जब ब्रिजु के घर में सभी सोये हुए थे ।

  तो ब्रिजु चुपके के उनके घर में गया और वहां से चक्की चुराके लेके भाग आया उसने सोच अगर मैंने चक्की को अपने घर में रखा और अगर ब्रिजु ने देख लिया तो वह दरोगा को बोल देगा और दरोगा मुझे जेल में डाल देगा ।

  इसलिए चक्की को किसी नदी में फेक देता हूँ इससे चक्की चोरी का सक मेरे ऊपर नही आएगा ब्रिजु ने चक्की को अपने पास वाले नदी में फेक दिया और वहाँ से अपने घर चला गया और सो गया ।

  अगले दिन ब्रिजु सो के उठा तो उसने देखा की उसके घर में चक्की नही है, ब्रिजु ने आस पास के सभी लोगो से पूछा की क्या आपने मेरी चक्की को किसीको लेजाते हुई देखा है सभी कहते नही भाई हमने नही देखा है ।

  वह अपने भाई से भी पूछने गया की भाई तुमने मेरी चक्की को देखा है उसका भाई बोलने लगा मैं क्यूँ देखने लगा तेरी चक्की को मुझे नही पता तेरी चक्की कहाँ है चल जा यहाँ से और मुझे परेसान मत कर ।

  यह कहकर ब्रिजु को वहाँ से भाग दिया और ब्रिजु वहां से चुप चाप चला गया ब्रिजु के पास अभी प्रयाप्त उतने पैसे नहीं थे की वह नई चक्की ले सके ब्रिजु अपने चक्की को खोज-खोज कर थक गया था इसलिए वह एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ कर रोने लगा ।

  और भगवान से अपनी मदत की गुहार करने लगा की है भगवान मेरी मदत करो अगर मैं चक्की से आनाज नही पिसुंग तो मेरा परिवार भूखे मार जाएगा तभी भगवान उसकी आवाज सुनकर प्रकट हुए ।

   और बोले की मैं हूँ ना मेरे होते हुए तुम्हारे परिवार को कुछ नही होगा तुम फिक्र मत करो मैं तुम्हे एक ऐसी चक्की दूंगा की वह एक साथ दस गांव का आनाज पीस सकेगी और अगर इस चक्की को कोई तुमसे चुराता है ।
 
   तो यह चक्की तुम्हारे पास वापस आजायेगी लेकीन, चुराने वाला और तुम्हारा बुरा चाहने वाला व्यक्ति गरीब हो जायेगा और उसे कभी भी ज्यादा धन की प्राप्ति नही होगी।

   यह कहकर भगवान ने उसे एक चक्की दे दी और उस चक्की को पाकर ब्रिजु बहुत प्रसन्न हुआ और उस चक्की को लेकर अपने घर चला गया, अब ब्रिजु एक साथ कई गांव का आनाज एक साथ पीस सकता था ।

  इससे वह बहुत जल्द ही धनवान होगया, अपने भाई से भी ज्यादा धनवान और यह देखकर उसके भाई को उससे और ईर्षा होने लगी उसने फिर एक बार उस चक्की को चुराने की कोसीस की ।

  लेकीन जैसे ही वह चक्की को चुरा कर थोड़ी दूर भागा तो वह चक्की ब्रिजु के भाई के हाथ से गायब होकर अपनी जगह पर चली गई, ब्रिजु का भाई अचंभीत में पड़ गया की चक्की कहाँ गई ।

  वह फिर से ब्रिजु के घर गया देखने के लिए की कहीं चक्की वहाँ पर तो नही वह जैसे ही वहाँ जाकर देखा तो चक्की उसकी जगह पर थी ब्रिजु का भाई सोचने लगा की यह कैसे हो सकता है मैं चक्की को यहां से लेके गया था फिर चक्की वापस यहां कैसे आगई ।

  उसने फिर से वहाँ से उस चक्की को उठाया और उसे पास ही के नदी में फेक कर आगया और उसे लगा की उसने चक्की को फेक दिया है लेकीन चक्की वापस अपनी जगह पर चल गई थी ब्रिजु का भाई निश्चिन्त जाकर अपने घर सो गया ।

   अगले दिन ब्रिजु के घर के सारे गहने, पैसे, सब कुछ चोरी होगया था, और उसकी दुकान को भी चोरोने लूट लिया था अब ब्रिजु बहुत ही गरीब हो चुका था वह जितना भी पैसा कमाने की कोसीस करता लेकीन विफल रहता और वहाँ पर ब्रिजु दिन पे दिन धनवान होते जा रहा था ।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे कभी भी किसीका बुरा नही सोचना चाहिए वार्ना ऐसा न हो की हम जिसका बुरा सोच रहे हो वह बुरा हमारे साथ न हो जाए इसे कहते हैं जिसे करनी वैसी भरनी ।

(9) सोनू और मोनू #9 Short moral stories in hindi for class 7

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  सोनू और मोनू दो मित्र थे दोनों एक ही गाँव में रहते थे, दोनों में गहरी मित्रता थी सोनू और मोनू की पैसे को लेकर आपस में लड़ाई हो गई ।

   सोनो और मोनू की लड़ाई देख एक आदमी आया उनका झगड़ा सुलझाने के बहने लेकीन उसने भी उन दोनों के अंदर और झगड़ा बढ़ा दिया ।

   सोनू और मोनू आपस में लड़ के जख्मी होगये और मैके का फायदा उठाकर वह तीसरा आदमी दोनों के पैसे लेकर फरहर होगया ।

सिख:- दो व्यक्ति की लड़ाई में हमेसा तीसरा ही फायदा उठता है, इसलिए हमे सन्ति पूर्ण ढंग से लड़ाई को सुलझाना चाहिए ।

(10) साहूकार और किसान #10 Moral stories in hindi for class 7 with pictures

 Moral stories in hindi for class 7

  एक छोटे से गांव साहूकार रहता था वह साहूकार बड़ा ही जालिम साहूकार था, वह साहूकार लोगो के ऊपर तनिक भी दया नही दीखता ।

 साहूकार किसानों को कर्जा देता और उनसे कोरे कागज पे अंगूठा लगा लेता और जो उस साहूकार के मन में आता वह उस कागज पे लिख लेता ।

 उस साहूकार ने कितने ही किसानों को अपने घर में उस कागज के जरिये मजदूर बना के रखा था और कई किसानों की जमीन भी हड़प लेता, कुछ लोग इसके खिलाफ पुलिश में रिपोर्ट भी लिखने गए ।

 लेकीन जब पुलिश उससे पूछताछ करती तो वह उस कागज को दिखा देता जिनपर उसने उन किसानों के अंगूठे के नीसाण लिए थे, और इससे साहूकार हमेसा बच जाता ।

 अब धीरे धीरे लोग उस साहूकार की मक्कारी को समझने लगे और उन लोगो ने उस साहूकार से पैसे लेना ही छोड़ दिया ।

सिख:- हमे कभी भी बिना पढ़े किसी भी कागज पे अपने हस्ताक्षर नही करने चाहिए, और खास तौर पे जो कागज बिल्कुल कोरा हो उसके उपर तो हर्गिश नही ।

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(11) देवी और किसान #11 Moral stories in hindi for kids class 7

Moral stories in hindi for class 7

  बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में हरिया नामका एक किसान रहता था, हरिया बहुत ही गरीब था, हरिया के पास खेती करने के लिए केवल एक ही खेत थी, उसी खेती में वह काम करता ।

  एक दिन वह अपने कुदाल से अपने खेत को खोद रहा था आलू का बीज बोन के लिए तभी उसकी कुदाल टूट गई, हरिया के पास अभी उतना पैसा नही था की वह नया कुदाल ले सके ।

  वह एक नदी किनारे बैठकर रोने लगा की अब मैं क्या करू? मैं खेती कैसे करूँगा? अगर मैन खेती नही किया तो मेरा परिवार बिना खाये ही मार जाएगा यह सोच सोच कर वह रोने लगा ।

  तभी उस नदी में से एक देवी प्रकट हुई उस देवी ने हरिया से रोने का कारण पूछा तो हरिया ने अभी तक की उस पर घटित सारी घटना सुनाई वह देवी बोली बस इतनी छोटी सी बात के लिए रो रहे हो ।

 तुम फिकर मत करो तुम्हारी मदत मैं करूंगी बोले तुम्हे क्या चाहिए हीरे, मोती, जव्हर्ता, पैसा, महल, बस तुम बोलो की तुम्हे क्या चाहिए मैं वह सारी चिझे तुम्हे दे दूंगा।

   हरिया बहुत की खुद्दार आदमी था, हरिया बोला की नही मुझे यह सब नही चाहिए, मैं अपनी मेहनत की कमाई खाता हूँ, तुम अगर मुझे जो भी झिज़ दिया वह चीज़ एक ना एक दिन खत्म हो जाएगी, और मैं उस झिज़ का आदि होजाउँग, जिससे मैं मेहनत नही कर पाऊंगा, और मैं आलसी हो जाऊंगा ।

  इसलिए अगर तुम कुछ मुझे देना ही चहिती हो तो मुझे एक कुदाल दे दो जिससे मैं अपने खेत की खुदाई कर संकु, वह देवी हरिया के ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुई, और बोली ठीक है, उस देवी ने हरिया को एक कुदाल दे दिया और बोली की यह कोई माहमुली कुदाल नही है ।

   यह एक जादुई कुदाल है, यह कुदाल कभी नही टूटेगी, और अगर इस कुदाल को किसीने तुम्हारे पास से चुरा भी लिया तो यह कुदाल अपने आप तुम्हारे पास आजायेगी और इस कुदाल से तुम जो भी काम करोगे तुम्हे कभी भी थकावट नही होगी और तुम दुगनी मेहनत से इस कुदाल से काम कर पावोगे ।

  उस कुदाल के आलाव देवी ने हरिया को कुछ सोने के सिक्के दिया और बोला यह सिक्के तुम्हारी ईमानदारी का इनाम है इसे स्वीकार करो हरिया ने राजी खुसी वह सिक्के और उस कुदाल को ले लिया ।

  और हरिया उस कुदाल से अपने और दुसरो के खेत में काम करने लगा दूसरे के खेतो में मजदूरी करने से उसे पैसे मिलते और उन पैसे से वह अपना घर बार चलता ।

  और देवी ने जो सोने के सिक्के हरिया को भेट दिया था उस सिक्को से हरिया ने 4 खेद खरीद लिए और हरिया उन खेतो में पूरी मेहनत करने लगा, और उस खेत में बोये गए आनाज और सब्जियों को उनके तैयार होने पर उन्हें वह बाजार में बेच देता ।

  अब हरिया को पहेली से कहीं ज्यादा मुनाफा होने लगा था, हरिया अब धनवान होगया था, हरिया का मित्र पप्पू उसके धनवान होने से काफी ज्यादा जलने लगा था, वह सोचने लगा की हरिया के पास पहले खाने के भी पैसे नही थे फिर वह अचानक इतना धनवान कैसे होगया ।

  पप्पू एक दिन हरिया के पास गया और उससे मीठी मीठी बाते करने लगा और इन मीठी मीठी बातों में उसने हरिया से पूछ लिया की तुम इतना धनवान कैसे बन गए हरिया ने पप्पू को अब तक की घटित सारी घटना बता दी।

  फिर पप्पू सारी बाते समझ गया और वह भी अपना कुदाल तोड़ कर नदी के किनारे रोने लगा तब वह देवी फिर से प्रकट हुई और उसके रोने का कारण पूछा पप्पू ने कहा की मेरा कुदाल टूट गया है इसलिए मैं रो रहा हूँ ।

   देवी बोली बस इतनी सी बात बोलो तुम्हे क्या चाहिए हीरे, मोती, सोना, चांदी, जो भी तुम्हे चाहिए तुम मांगो मैं तुम्हे वह सारी चीझ दे दूंगी पप्पू बड़ा ही लालची आदमी था पप्पू ने उस देवी से ढेर सारा सोना चांदी, मोती, हीरे, और एक बड़ा सा महल मांगा ।

   देवी समझ गई की यह लालची आदमी है, देवी ने पप्पू को सबक सीखने के लिए पप्पू को एक मटका दे दिया और कहा की इस मटके से तुम जो भी मांगोगे वह सारी इक्षा तुम्हारी पूरी होजाएगी ।

  और यह भी कहा की इस मटके से अपनी कोई भी इक्षा किसी एकांत जगह पर माँगना पप्पू एक एकांत जगह पर चला गया और उसने उस मटके से अपने लिए सोना मांगा, यह मांगते ही अचानक उस मटके में से ढेर सारी सी मधुमखिया निकल गई और उसे काटने लगी ।

   उन मधुमखिया से बचने के लिए पप्पू एक तालाब के अंदर जाकर कूद गया, जब तक मधुमखिया वहाँ से नही गई तब तक पप्पू उस तालाब के अंदर ही रहा उनके जाने के बाद ही बाहर निकला ।

   पप्पू के उस्के लालच का फल मिल चुका था, पप्पू का नदी के किनारे कभी भी नही गया और किसी दूसरे को जाने की सल्लाह भी नही दी ।

Moral stories in hindi for class 7

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