Bandar ki kahaniya | बंदर की कहानिया

bandar ki kahani:- नमस्कार दोस्तो अगर आप bandar aur magarmach ki kahani पढ़ने के लिए यहां आये हैं तो आपको इस लेख में आपको बंदर और मगरमच्छ की यह कहानी इस लेख में पढ़ने को नही मिलेगी आपको मेरे दूसरा लेख पढ़ना होगा इस लेख में आपको सिर्फ bandar ki kahani पढ़ने को मिलेगी।

Bandar ki kahani

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  • दो बंदर और हरिया 
  • दो बिल्ली और बंदर

दो बंदर और हरिया #1 Bandar ki kahani

Bandar ki kahani

  एक बार की बात है एक मदारी के पास चिंटू नामक बंदर था, चिंटू बहुत ही सरारती किस्म का बंदर था, मदारी जितना चिंटू को सिखाता चिंटू उतना ही जल्द वह चिझे आसानी से सिख जाता ।

  मदारी चिंटू को बाजार में लेके जाता और चिंटू से कर्तब करवाता जो मदारी ने चिंटू को सिखाया था, चिंटू बहुत अछि तरह से वह कर्तब करता और लोगो की वाह वही और तालिया बिटोरता ।

   लोगो को मदारी और चिंटू का कर्तब बहुत ही पसंद आता लोगो उन दोनों के कर्तब का पैसा दे देते, मदारी चिंटू को भर पेट खाना खिला देता चिंटू इससे बहुत ही प्रसन्न था ।

  की उसका मालिक बहुत अच्छा है, उसे हर रोज अच्छा खाना खिलता है, एक दिन मदारी एक बाजार में गया उस बाजार में उसने कर्तब दिखाया, कर्तब देखने वाले दर्शको के बीच एक आदमी था, जिसका नाम हरिया था ।

  हरिया ने देखा की मदारी और बंदर कर्तब दिखाके बहुत पैसा कमा रहे हैं, मदारी सिर्फ बोलने का काम कर रहा है बाकी सब काम तो यह बंदर ही कर रहा है, इस बंदर के वजह से लोग इस मदारी को पैसा दे रहे हैं ।

  हरिया ने सोच की क्यूँ ना इस बंदर को चुरा लिया जाए और इस बंदर से कर्तब दिखाकर ढेर सारा पैसा कमाया जाए हरिया ने उस मदारी और बंदर का पीछा करते करते उनके ठिकाने पर जा पहुंचा।

  मदारी ने उस बंदर को एक पेड़ के पास बांध दिया और उसे खाना देकर सोने चला गया जैसे ही थोड़ी रात हुई मदारी और बंदर के सो जाने के बाद हरिया ने मौका देखकर उस बंदर को लेकर वहाँ से फरहर हो गया ।

  हरिया के पास एक दूसरा भी बंदर था उस बनादर को भी हरिया ने एक दूसरे कर्तब दिखाने वाले मदारी से चुराया था हरिया ने चिंटू को लेजाकर उस बंदर के पास बांध दिया ।

  जैसे ही चिंटू सुबह उठा तो उसने देखा की वह दुशरी जगह है, और उसके बगल में एक बंदर सोया हुआ है, चिंटू ने उस बंदर को जगाया और उससे उसका नाम पूछा बंदर ने कहा की मेरा नाम मोती है ।

चिंटू:- क्या तुम जानते हो की मैं यहां कैसे पहुंचा

मोती:- हां मैं जनता हूँ तुम यहां कैसे पहुंचे, काल रात को तुम्हे हरिया यहां लेकर आया ।

चिंटू:- हरिया कौन है ।

मोती ने हरिया के बारे में सब कुछ चिंटू को बताया और चिंटू को यहाँ लाने का करना भी बताया

चिंटू:- यह सब सुनने के बाद बोला की मैं उस कपटी के लिए कर्तब नही दिखाऊंगा ।

मोती:- अगर तुम कर्तब नही दिखावोगे तो हरिया तुम्हे चाबुक से पेड़ में बांधकर बहुत मारे गया और तुम्हे खाना भी नही देगा ।

चिंटू:- यह सब सुनने के बाद दर गया और कर्तब दिखाने के लिए राजी होगया ।

  जैसे ही चिंटू और मोती की बात खत्म हुई वैसे ही हरिया वहाँ आ पहुंचा और उन दोनों को बाजार में लेकर गया और उनसे कर्तब करने लगा हरिया को उन दोनों से बाजार में बहुत पैसा मिला ।

  वह शाम को जब अपने ठिकाने पर पहुंचे, हरिया ने दोनों को पाँच-पाँच केले दिया खाने के लिए और वहाँ से चला गया चिंटू ने केले को देखकर कहा ।

चिंटू:- इतने केले में तो मेरा पेट भी नही भरेगा, हमारे से उसने उतना कमाया और सिर्फ इतना ही खाने को दिया ।

मोती:- यह आदमी सिर्फ इतना ही खाने को देता है और बाकी पैसे को बचा के रखता है ।

चिंटू:- इससे अच्छा तो मेरा पुराण मालिक था वह मुझे रोज भर पेट और तरह तरह के पकवान खाने को देता था।

  चिंटू ने हरिया को फ़ोन पर बाते करते हुए सुना की मैं यह रोज रोज के मदारी के खेल दिखाकर थक गया हूँ, इन खेल को दिखाकर मुझे ज्यादा पैसा भी नही मिलता है, तुम मेरे लिए दुबई में कोई काम देखो मेरे पास अभी ढेर सारे पैसे हैं मैं दुबई आकर कोई काम कर लूंगा ।

  और इन बंदरो को कोई चिड़ियाघर में बेच दूंगा इतना कहकर उनसे फोन काट दिया

चिंटू:- चिंटू ने मोती को कहा की इसे हमे सबक सीखना होगा नही तो इसे अगर दुबई जाने का मौका मिल गया तो यह हमे चिडिघर में बेच देगा और हमें अपनी पूरी जिंदगी उस कैद में गुजारनी होगी ।

मोती:- ने कहा ठीक है,  लेकीन यह सब होगा कैसे हम उसे कैसे सबक सिखाएंगे ।

चिंटू:- हमे उसके रखे हुए सारे पैसे जला देंगे और यहां से किसी जंगक में भाग जाएंगे ।

मोती:- हाँ यह ठीक है हम ऐसा ही करेंगे

  एक दिन हरिया किसी काम से बाहर गया हुआ था दोनों बंदरो ने किसी तरह अपने आप को उस बंधन से आजाद किया और हरिया जिस मेटि में अपने सारे पैसे रखे थे उन पैसों को जलाकर वहाँ से भाग गए ।

  हरिया जब आया तो उसने यह सब देखकर अपना सर पिट पिट कर रोने लगा ।

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दो बिल्ली और बंदर #2 Bandar ki Kahaniya 

 Bandar ki Kahani

 एक गांव में दो बिल्लियां रहती थी वह दोनों बिल्लियों बहने थी दोनों बहुत ही सरारती थी दोनों आपस में हमेसा किसी न किसी बात पर लड़ती और झगड़ती रहती थी ।

 दोनों में से अगर किसी को कुछ भी खाने की वस्तु मिली तो वह उन्हें भी बाटकर नागी खाती थी उस खाने के वस्तु के लिए भी झगड़ती रहती थी ।

 एक दिन उन दोनों बिलयो में से एक बिल्ली को एक पनीर का टुकड़ा मिला एक बिल्ली बोलने लगी की यह पनीर का टुकड़ा मुझे मिला है इसे मैं ही खाऊँगी ।

  दुशरी बल्ली बोलने लगी की नही मैं तुझसे बड़ी हूँ पहले मैं खाऊँगी फिर जो मेरे खाने के बाद बचेगा उसे तू खाना पहली बिल्ली को दुशरी बिल्ली का सुझाव पसंद नही आया ।

  वह बोलने लगी की नही मैं ऐसा नही होने दूंगी मैं तुझे अपना टुकड़ा नही दूंगी दोनों आपस में इसी बात पर आपस में लड़ने लगी तभी वहाँ से एक बंदर गुजर रहा था।

 उस बंदर ने दोनों बिल्लियों का लड़ने का कारण पूछा दोनों बिल्लियों ने अपने लड़ने का सारा करना उस बंदर को बताया वह बंदर सोचने लगा की वैसे भी मुझे भूख लगी है ।

 क्यूँ न इन बिल्लियों का पनीर ही मैं खा लू, मैं आगर उनसे इस पनीर में से हिस्सा मांगने जाऊंगा तो वह मुझे नही देंगे और मुझे यहां से मारके भी भगा देंगी इसलिए मुझे चतुराई से इनसे पनीर का टुकड़ा माँगन होगा ।

 बनादर ने थोड़े सोच विचार के बाद उन दोनों बिल्लियों से कहा की मैं इस पनीर का आधा-आधा बटवारा करता हूँ फिर तुम दोनों आराम से इस पनीर को खा लेना ।

 दोनों बिल्लियों को बंदर का सुझाव बहुत पसंद आया वह दोनों इस बात कस लिए राजी होगई बंदर ने उस पनीर का आधा टुकड़ा किया ।

 बंदर ने एक टुकड़े के तरफ देखकर कहा की यह टुकड़ा इस टुकड़े से थोड़ा से बड़ा है, मैं इसे थोड़ा सा खा लेता हूँ ताकि बरोबर हो जाये ।

  बंदर इस उस टुकड़े में से थोड़ा सा खा लिया और दूसरे टुकड़े के तरफ देखकर कहा अरे यह मैन क्या किया यह टुकड़ा इस टुकड़े से थोड़ा बड़ा होगया रुको मैं इसे थोड़ा खा लेता हूँ ताकि बराबर होजाये ।

  ऐसा बोल बोलकर उस बंदर ने उस पनीर के टुकड़े को खा गया अब बस उसके हाँथ में एक चोट से पनीर का टुकड़ा बचा था उसने बिल्लियों से कहा मैन तुम्हारी इतनी मदत की उसका यह इनाम यह बोलकर उसने वह भी टुकड़ा खा लिया ।

  और बोला की अच्छा मैं चलता हूँ फिर मिलेंगे पनीर के टुकड़े को खाने के बाद बंदर वहां से तेजी में छलांग मारकर चला गया और वह दोनों बिल्लियों उस बनादर को देखती ही राह गई और बंदर वहां से रवाना होगया ।

  दोनों बिल्लियों को अपने गलती के ऊपर पछतावा हुआ और उन्होंने फीर कभी नही लड़ने का निश्चय किया ।

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सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमेसा किसी दो के झगड़े में तीसरा ही फायदा उठाता है इसलिए हमे लड़ने के बजाय आपस में ही झगड़े को सुलझाना चाहिए

तो मेरे प्यारे मित्रो आपको कैसे लगी यह bandar ki kahani मुझे कमेंट कर के जरूर बताये अगर आपको यह बंदर की दोनों कहानिया पसंद आई तो अपने मित्रों के साथ जरूर शेयर करना ।