जादुई बकरी | jaadui bakri panchatantra hindi kahaniya for kids

जादुई बकरी jaadui bakri panchatantra hindi kahaniya for kids  


Jaadu bakri panchatantra hindi kahaniya for kids

  रामपुर नामक एक गांव था और उस गांव में एक हरिया  नामक एक किसान रहता था, हरिया के पास खेती करने के लिए सिर्फ एक ही खेत था और घर में खाने वाले चार उस खेती से उसका गुजर नही हो पता था ।

  हरिया ने अपने गांव में के सभी साहूकारों से पैसा लेके रखा था, लेकीन एक भी शाहूकार को अभी तक पैसा नही दिया था अब कोई भी शाहूकार हरिया को पैसा नही दे रहा था ।

  हर शाहूकार बोलता की पहले पुराण हिसाब चुकता करो तभी हम पैसा देंगे लेकीन हरिया भी क्या करता कहँ से पैसा लेके आता ।
 
  हरिया एक दिन ऐसे ही उदास एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था तभी एक बूढ़ी औरत वहाँ से गुजर रही थी उस बूढ़ी औरत के पास एक भारी थैला था, बूढ़ी औरत अब थक चुकी थी और वह वहीं हरिया के पास बैठ गईं ।

  और हरिया से बाते करने लगी, बूढ़ी औरत ने हरिया से पूछा बीटा तुम इतने उदास क्यूँ बैठे हो, हरिया ने उस बूढ़ी औरत को सारी बात बताई, बूढ़ी औरत ने कहा की मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है अगर तुम मेरे साथ मेरे घर चलोगे तो मैं तुम्हे वह चीझ दे दूंगी ।

   हरिया इसके लिए राजी होगया और वह उस बूढ़ी औरत का समान उठाकर उसके साथ उसके घर गया, उस बूढ़ी औरत ने हरिया को एक बकरी दी और कहा की यह कोई साधरण बकरी नही है, यह एक जादुई बकरी है ।

   हरिया ने पूछा की वह कैसे तो बूढ़ी औरत ने कहा की ये बकरी को तुम सिर्फ चावल खिलाना और जब बकरी वह चावल खाकर लैटरिंग करेगी तो उस लैटरिंग को एक हरे कपड़े में लपेट के रख देना वह अगले दिन मोतियों में बदल जाएगा ।

  हरिया को इस बात के ऊपर भरोसा नही हुआ फिर भी  वह उस बकरी को लेकर घर गया और उसे चावल खिलाया और उसकी लैटरिंग को उसने हरे कपड़े में लपेटकर रख दिया और अगले दिन वह जब वह सो के उठा तो सबसे पहले उस हरे कपड़े को देखने गया ।

  जब हरिया ने कपड़े में मोतियों को देखा तो वह आस्चर्य चकित राह गया और उसके खुसी का ठिकाना ही नही था, उसने उन मोतियों को सोनार के पास बेच दिया ।
 
   और उससे जो भी पैसे आये उसने उन पैसे से अपने लिए और अपने बच्चों के लिए कपड़े और अपने घर के लिए राशन खरीदे हरिया प्रतिदिन उस बकरी को चावल खिलता और उन मोतियों को सोनार के पास बेच देता साहूकारों का भी कर्जा उसने चुका दिया ।

   अब हरिया के पास इतने पैसे आगये थे की उसने उस अपने गांव में अपनी एक किराने की दुकान खोल ली और  अब उसके पास पैसे की कमी नही थी और नाही उसके घर में कोसी भी चीझ की कमी थी ।

   बकरी उनके घर की दरिद्रता दूर कर कर उनके घर से चली गई हरिया को बकरी के जानेका दुख नही हुआ क्यूंकि उसका गुजर उस किराने दुकान से चल जाता था ।

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